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चार राज्यों के विधानसभा चुनाव का भी ऐलान,J&K पर फैसला नहीं


Jabalpur:

नई दिल्ली.  17वीं लोकसभा की 543 सीटों के लिए चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों में होंगे और मतगणना 23 मई को की जायेगी. इन लोकसभा चुनावों के साथ आँध्र प्रदेश, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की विधानसभाओं के चुनाव भी होंगे लेकिन जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव राज्य की सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अभी नहीं कराये जायेंगे.

आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार ओडिशा में 11 अप्रैल से 29 अप्रैल के बीच चार चरणों में लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी कराए जाएंगे. कार्यक्रम के मुताबिक, ओडिशा में 11, 18, 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. वहीं, आंध्र प्रदेश में भी 175 विधानसभा सीटों पर लोकसभा चुनाव के साथ ही पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान किया जाएगा. आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनाव में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और वाईएसआर कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं. इन सबके इतर आपको बता दें कि देशभर में मतदाताओं की सबसे अधिक संख्या के मामले में आंध्र प्रदेश तीसरे नंबर पर है. वर्ष 2014 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 7.7 फीसदी मतदाता हैं.

इस बार चुनाव में इस्तेमाल होने वाली सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल किया जायेगा. इस चुनाव में पहली बार पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाली चुनाव प्रचार सामग्री पर रोक लगाते हुए सिर्फ पर्यावरण अनुकूल चुनाव प्रचार सामग्री के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभी वहां सिर्फ लोकसभा चुनाव कराने का फैसला लिया गया है. विधानसभा चुनाव इन चुनावों के साथ नहीं कराये जायेंगे. राज्य की सभी छह लोकसभा सीटों के लिए चुनाव चार चरणों में 23 अप्रैल, 29 अप्रैल, छह मई और 19 मई को कराये जायेंगे. मतगणना 23 मई को होगी.

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष पर्यवेक्षक सर्वश्री नूर मोहम्मद, ए. एस. गिल तथा विनोद जुत्शी नियुक्त किये गये हैं. मोहम्मद भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी हैं तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं. गिल भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे हैं और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक रह चुके हैं. जुत्शी पूर्व आईएएस अधिकारी हैं तथा चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त रह चुके हैं. आयोग ने इस संबंध में जम्मू-कश्मीर सरकार, गृह मंत्रालय तथा केन्द्र और राज्य की विभिन्न एजेंसियों से विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया है. आयोग की टीम स्वयं राज्य के दौरे पर गई थी जहां उसने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की तथा स्थिति और चुनाव तैयारियों का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि राज्य में हाल की हिंसा की घटनाओं तथा उम्मीदवारों की सुरक्षा पर विचार किया गया. यह महसूस किया गया कि वहां केन्द्रीय अद्र्धसैनिक बलों की पर्याप्त संख्या में तैनाती करने में मुश्किल होगी, इसलिए अभी सिर्फ लोकसभा चुनाव कराने का फैसला किया गया.